यीशु के साथ रहने से आने वाला साहस
प्रेरितों के काम 4 अध्याय में बाइबल का एक अद्भुत चित्र दिखाई देता है—सच्चे आत्मिक साहस का। पतरस और यूहन्ना शक्तिशाली धर्मगुरुओं के सामने बिना भय के खड़े हुए, जबकि उन्हें “अनपढ़ और साधारण” लोग माना जाता था। फिर भी लोगों ने पहचान लिया कि वे यीशु के साथ रहे थे (प्रेरितों के काम 4:13)। उनका साहस उनकी शिक्षा, योग्यता या व्यक्तित्व से नहीं आया था। वह पवित्र आत्मा की सामर्थ से आया था। पतरस पवित्र आत्मा से भरकर बोला, और बाद में विश्वासियों ने सुरक्षा नहीं, बल्कि परमेश्वर के वचन को और अधिक साहस से बोलने की प्रार्थना की। यह अध्याय सिखाता है कि बाइबिल का साहस घमंड या ऊँची आवाज़ नहीं है। यह परमेश्वर की आज्ञा मानने, सत्य बोलने और विरोध के बीच भी विश्वासयोग्य बने रहने का साहस है। शिष्यों ने धमकियाँ और विरोध सहा, फिर भी वे चुप नहीं रहे क्योंकि वे जानते थे कि यीशु जीवित हैं। आज भी परमेश्वर साधारण लोगों को सामर्थ देता है। यीशु के साथ बिताया गया समय भयभीत हृदयों को साहसी गवाहों में बदल देता है। Boldness That Comes from Being with Jesus Acts 4 presents one of the clearest pictures of spiritual boldn...