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Showing posts from June, 2026

परमेश्वर और परिवार निर्मान

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  परमेश्वर कैसे ऐसे परिवार बना रहा है जो आँधियों में भी अडिग रहें और पीढ़ियों तक फलते-फूलते रहें जब यीशु ने बुद्धिमान व्यक्ति की उस कहानी को सुनाया जिसने अपना घर चट्टान पर बनाया, तो उन्होंने केवल भवन निर्माण की नहीं, बल्कि जीवन और परिवार निर्माण की बात की थी (मत्ती 7:24-25)। परमेश्वर केवल व्यक्तियों को नहीं बचाता; वह ऐसे घर और परिवार बना रहा है जो संकटों का सामना कर सकें और आने वाली पीढ़ियों के लिए आशीष बनें। हर स्थायी घर की शुरुआत नींव से होती है। परमेश्वर अपने बच्चों की पहचान और उन्हें मिलने वाले बिना शर्त प्रेम को नींव बनाता है। हम अपने कार्यों के कारण नहीं, बल्कि उसके प्रेम के कारण उसकी संतान कहलाते हैं (1 यूहन्ना 3:1)। यही स्वीकृति परिवार को स्थिरता प्रदान करती है। इसके बाद वह सुरक्षा की दीवारें खड़ी करता है। वह हमारी आवश्यकताओं की पूर्ति करता है और अपनी उपस्थिति से हमारी रक्षा करता है (मत्ती 6:32; भजन संहिता 46:1)। उसके वचन के स्तंभ परिवार को दृढ़ बनाए रखते हैं, जबकि शिक्षा और प्रेमपूर्ण अनुशासन चरित्र का निर्माण करते हैं (भजन संहिता 32:8; इब्रानियों 12:6)। परमेश्वर घर में ऐस...

हम सफर: हृदय से राज्य तक परमेश्वर के साथ एक दिव्य यात्रा

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  "हे छोटे झुंड, मत डर; क्योंकि तुम्हारे पिता को यह भाया है कि तुम्हें राज्य दे।" (लूका 12:32) मसीही जीवन केवल एक धर्म का पालन करना नहीं है; यह परमेश्वर के साथ एक जीवन-यात्रा है। यह यात्रा एक बीज से आरम्भ होती है और राज्य में समाप्त होती है। इसी सत्य को स्मरण रखने के लिए "हम सफर" एक सुंदर आध्यात्मिक रूपरेखा प्रस्तुत करता है। ह – हृदय: वचन का बीज हर यात्रा हृदय से शुरू होती है। यीशु ने बोने वाले के दृष्टान्त में बताया कि परमेश्वर का वचन एक बीज के समान है, जो हमारे हृदय की भूमि में बोया जाता है। यदि हमारा हृदय ग्रहणशील और आज्ञाकारी है, तो वही बीज फलवंत जीवन उत्पन्न करता है। प्रश्न यह नहीं कि बीज कैसा है; प्रश्न यह है कि हमारी भूमि कैसी है। अ – आत्मा: नया जन्म और मुहर मनुष्य अपने प्रयासों से परमेश्वर के राज्य में प्रवेश नहीं कर सकता। हमें पवित्र आत्मा के द्वारा नया जन्म लेना पड़ता है। वही हमें जीवित करता है, परमेश्वर की संतान बनाता है और हमारे उद्धार पर अपनी मुहर लगाता है। पवित्र आत्मा केवल एक सामर्थ्य नहीं, बल्कि परमेश्वर की उपस्थिति है, जो हमें मार्गदर्शन देती, सिखात...